लहसुन हमारे इस धरती पर सबसे स्वास्थ्यप्रद भोजनो में से एक है। इतना ही नहीं ये ढेरों सारे पोषक तत्वों से भरपूर होता है यही कारण है कि ये हमें बहुत सारे स्वास्थ्य लाभ देता है। इसीलिए अगर आप लहसून का सेवन हर रोज करते हैं। तकिये के पास लहसून रखने से मिलते हैं विशेष फायदे। नींद लाने में मदद करता है लहसुन यदि आपको अच्छी नींद नहीं आती है तो घबराए नहीं लहसुन है ना। अगर आपको भी अच्छी नींद लेनी है तो लहसुन को तकिये में रखें। तकिये में लहसुन रखने से बताया जाता है की बुरी शक्तियाँ पास भी नहीं आती है। लीवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है लहसुन शायद ये बात आपको पता न हो लेकिन बता दें कि लहसुन लीवर को कमजोर नहीं होने देता है और ये सर्दी में जुकाम और फ्लू से भी बचाता है। आयुर्वेद में लहसुन को एक प्राकृतिक दवा के रूप में माना गया है जो हर तरह के रोग से लड़ने की क्षमता रखता है। लहसुन को मसल कर खाने से उर्जा प्राप्त होती बता दें कि अगर आप लहसुन का प्रयोग एकदम सीधा सीधा खाते हैं तो हमें रोग से लड़ने की ताकत तो देगा पर यही लहसुन को हम अगर मसल कर खायेंगे तो हमें एक अलग शक्ति देगा। लहसुन में रोगों स...
Diabetes की बीमारी, आयुर्वेद में है इलाज
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लाइफस्टाइल और खानपान में आए बदलावों के चलते कम उम्र के लोग भी Diabetes के मरीज बनने लगे हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में Diabetes की बीमारी इतनी तेजी से बढ़ रही है कि भारत दुनिया का Diabetes कैपिटल बनता जा रहा है।
कई बार लोगों को पता भी नहीं चलता और वह Diabetes के मरीज बन जाते हैं क्योंकि वे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। आयुर्वेद में Diabetes का इलाज है। इस बारे में विस्तार से बता रहे हैं आयुर्वेद एक्सपर्ट प्रदीप दुआ…
कई बार लोगों को पता भी नहीं चलता और वह Diabetes के मरीज बन जाते हैं क्योंकि वे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। आयुर्वेद में Diabetes का इलाज है। इस बारे में विस्तार से बता रहे हैं आयुर्वेद एक्सपर्ट प्रदीप दुआ…
Diabetes के लक्षण
– बार-बार पेशाब आना, खासकर रात के वक्त- पेशाब करने के बाद पेशाब में चीटियां जमा हो जाना- बहुत ज्यादा प्यास लगना और मुंह में चिपचिपापन रहना- पसीने में बदबू ज्यादा होना- फोड़े-फुंसियां ज्यादा होना- घाव का जल्दी न भरना
Diabetes होने की वजहें
आयुर्वेद के अनुसार वैसे लोग जो मुंह के सुख के लिए खाना खाते हैं यानी उल्टी-सीधी चीजों का सेवन करते हैं, आलस से भरी जिंदगी जीते हैं, नया अनाज ज्यादा खाते हैं, दही का ज्यादा सेवन करते हैं और मीठी चीजें ज्यादा खाते हैं, वे Diabetes का शिकार हो सकते हैं।
आयुर्वेद में 2 तरह का Diabetes बताया गया है
सहज प्रमेह: यह जन्मजात या वंशानुगत होता है। यह टाइप-1 Diabetes जैसा ही है।अपत्थजनक प्रमेह: यह गलत जीवनशैली से होता है। इसे टाइप-2 Diabetes जैसा मान सकते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार Diabetes में क्या खाएं
– सब्जियों में करेला, पालक, लौकी, सहजन, कड़ी पत्ता, खीरा, परवल, मेथी, चने का साग, नींबू, टमाटर आदि खाएं।- फलों में संतरा, आंवला, मौसमी, सिंघाड़ा, पपीता, जामुन आदि खाएं। ध्यान रखें कि जामुन के बजाय जामुन की गुठली ज्यादा फायदेमंद है। गुठली को सुखाने के बाद पीसकर पाउडर बना लें, फिर खाएं।- जौ और चने के आटे से फायदा होता है। गेहूं, सोयाबीन आदि का मिक्स आटा भी अच्छा है। जितना हो सके, पुराना अनाज खाएं।- मूंग, चना, कुल्थी की दालें अच्छी हैं।- खाने में सरसों का तेल इस्तेमाल करें।
Diabetes में क्या न खाएं
– गरिष्ठ चीजें: रेड मीट, अंडे का पीला हिस्सा, अरबी, उड़द दाल न खाएं- मीठी चीजें: चीनी, गुड़, मिठाई, चॉकलेट, आइसक्रीम के अलावा मीठे फल केला, चीकू, आम, अंगूर आदि न खाएं- चिकनी चीजें: घी-तेल, मक्खन, क्रीम, खोया आदि।- Diabetes के मरीज जूस बिलकुल न पिएं, फिर चाहे पैक्ड हो या ताजा। ताजे फल खाना ज्यादा फायदेमंद है
ये चीजें भी हैं फायदेमंद
– रोजाना रात में सोने से पहले करीब आधा छोटा चम्मच त्रिफला चूर्ण लें।
– रोजाना दूध में एक छोटा चम्मच हल्दी मिलाकर लेना काफी फायदेमंद है।
– मेथी के बीज भिगोकर या पीसकर लें। मेथी के पत्ते पेट के लिए ज्यादा अच्छे हैं जबकि बीज Diabetes के लिए।
– गुड़मार (मेषशृंगी) की कुछ पत्तियां रोजाना चबाएं या पानी में उबालकर उस पानी को पी लें।
– विजयसार की लकड़ी का चूर्ण बनाकर इस्तेमाल करें या इसके कुछ टुकड़े रात में पानी में डाल दें, सुबह उठकर यह पानी पिएं।
– देसी अश्वगंधा या डोडा पनीर को रात भर पानी में भिगो रखें और सुबह इस पानी को पी लें।
Diabetes में फायदेमंद आसन और प्राणायाम
– पवनमुक्तासन, पश्चिमोत्तानासन, शलभासन, धनुरासन, मयूरासन- प्राणायाम: भ्रामरी और भस्रिका प्राणायाम Diabetes के लिए ज्यादा फायदेमंद है।
– भ्रामरी प्राणायाम: दोनों हाथों को चेहरे पर लाएं। दोनों अंगूठों से कान बंद करें और तर्जनी उंगली आंखों के ऊपर रखें। मध्यमा नाक के पास, अनामिका होंठ के ऊपर और सबसे छोटी उंगली होंठ के नीचे। अब नाक से गहरी और लंबी सांस लें और भंवरे की गुंजन-सी आवाज गले से निकालते हुए धीरे-धीरे सांस बाहर निकालें। इसे 5 राउंड कर लें।भस्रिका प्राणायाम: सुखासन में बैठ जाएं। लंबी सांस भरें और फिर झटके से सांस बाहर निकालें। इस दौरान पेट अंदर की तरफ जाएगा। 3 बार कर लें।
-एजेंसियां
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